Wednesday, December 26, 2018

लॉर्ड लिटन, 1876-80 (Lord Lytton, 1876-1880)आधुनिक भारत

लॉर्ड लिटन, 1876-80 (Lord Lytton, 1876-1880)आधुनिक भारत (MODERN INDIA)

लॉर्ड लिटन 1876-80 (Lord Lytton)

  • अप्रैल 1876 में लॉर्ड लिटन ने लॉर्ड नार्थबुक के उत्तराधिकारी के रूप में भारत के गवर्नर जनरल का पद भार सम्भाला.

लॉर्ड लिटन, 1876-80 (Lord Lytton, 1876-1880)आधुनिक भारत (MODERN INDIA)

लॉर्ड लिटन और मुक्त व्यापार (Lord Lytton and Free Trade):

  • जुलाई, 1877 में ब्रिटिश सरकार ने लॉर्ड लिटन को यह आदेश दिया कि भारत में कपास के आयात पर लगने वाला कपास शुल्क (Cotton Duties) समाप्त कर दिया जाए.
  • लॉर्ड लिटन ने अकाल के कारण शोचनीय वित्तीय स्थिति के होते हुए भी कपास शुल्क समाप्त कर दिया.
  • इस कृत्य से जनता में काफी आक्रोश फैल गया.

वित्तीय सुधार (Financial Reforms)

  • लॉर्ड मेयो द्वारा प्रस्तुत वित्तीय विकेन्द्रीयकरण की नीति यथावत चलती रही.
  • इस दिशा में लॉर्ड लिटन ने एक सुधार किया.
  • उसने प्रान्तीय सरकारों को साधारण प्रान्तीय सेवाओं जैसे- भूमिकर, उत्पादन कर एवं आबकारी, टिकटें, कानून और व्यवस्था एवं सामान्य प्रशासन आदि पर व्यय करने का अधिकार दे दिया.
  • यह कहा गया कि प्रान्तीय सरकारें इस कार्य के लिए अपने साधनों से धन की व्यवस्था करें.
  • इससे यह आशा की गई कि प्रान्तीय सरकारें अपने साधनों का विकास करेंगी जिससे सरकार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो जाएगी.

1876-78 का अकाल (Famine of 1876-78)

  • सन् 1876 से 1878 तक भारत में भयंकर अकाल पड़ा.
  • अकाल से सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र थे- मद्रास, बम्बई मैसूर, हैदराबाद, मध्यभारत के कुछ भाग और पंजाब .
  • अकाल से निपटने के सरकार के तथाकथित प्रयासों की असफलता शीघ्र हो सामने आ गई.
  • 1878 में रिचर्ड स्ट्रेची की अध्यक्षता में एक “अकाल आयोग” का गठन किया गया.

राज-उपाधि अधिनियम, 1876 (Royal Titues Act, 1876) :

  • ब्रिटिश संसद् ने 1876 में महारानी विक्टोरिया को ‘केसर-ए-हिन्द’ की उपाधि से विभूषित करने के लिए एक राज-उपाधि अधिनियम पारित किया.
  • इस उपाधि को प्रदान करने के लिए दिल्ली में करोड़ों रुपये खर्च करके एक वैभवशाली दरबार का आयोजन किया गया.
  • एक तरफ यह करोड़ों रुपये का आयोजन था और दूसरी ओर भयंकर अकाल से जूझती भारत की असहाय जनता.
  • सरकार के इस कृत्य ने जनता को गम्भीर रूप से नाराज किया.

भारतीय भाषा समाचार पत्र अधिनियम मार्च, 1878 (Vernacular Press Act March, 1878) :

  • सरकार की दमनकारी नीतियों को भारतीय भाषाई समाचार पत्रों में खुलकर निंदा की जा रही थी.
  • सरकार ने इन समाचार पत्रों पर अंकुश लगाने के लिए मार्च, 1878 में भारतीय भाषा समाचार पत्र अधिनियम पारित किया.
  • इस अधिनियम के द्वारा भारतीय भाषाई के समाचार पत्रों के प्रकाशकों को दण्डनायक उचित एवं बाध्यकारी आदेश दे सकता था.
  • आदेश का उल्लंघन करने पर प्रायः छापाखाने जब्त कर लिए जाते थे.
  • दण्डनायक की आज्ञा के विरुद्ध किसी न्यायालय में अपील नहीं की जा सकती थी.

भारतीय शस्त्र अधिनियम 1878 (Indian ArrIs Act, 1878) :

  • लिटन की दमन कारी नीति का ही एक रूप 1878 का भारतीय शस्त्र अधिनियम था.
  • इस अधिनियम के अनुसार भारतीयों के लिए बिना लाइसेंस के हथियार रखना या इनका व्यापार करना एक दण्डनीय अपराध घोषित कर दिया था.
  • यह व्यवस्था यूरोपीय, ग्लो इंडियन और सरकारी अधिकारियों के संबंध में लागू न थी.

वैधानिक लोक सेवा (Statutory Civil Service) :

  • लॉर्ड लिटन ने 1878-1879 में वैधानिक लोक सेवा की एक योजना प्रस्तुत की.
  • इस योजना के अनुसार उच्च कुलीन भारतीयों की वैधानिक लोक सेवा में युक्ति की व्यथा की गई.
  • ये नियुक्तियां प्रान्तीय सरकारों की सिफारिश पर भारत सचिव की अनुमति से की जाती थी.
  • किन्तु यह “वैधानिक लोक सेवा” को वरथा भारतीयों में बहुत लोकप्रिय न हो सकी.
  • अत: आठ वर्ष बाद यह सेवा बन्द कर दी गई.

दूसरा अफगान युद्ध (The Second Afghan war) :

  • लॉर्ड लिटन ने पश्चिम में साम्राज्य के विस्तार के लिए अफगानिस्तान पर आक्रमण कर दिया.
  • किन्तु यह अभियान पूर्णत: असफल रहा.
  • इस युद्ध में सरकार का करोड़ों रुपया व्यय हो गया.

मूल्यांकन (Evaluation)

  • लॉर्ड लिटन को भारत में एक दमनकारी शासक के रूप में याद किया जाता है.
  • यह एक शासक के रूप में असफल रहा.
  • उसकी अप्रिय और दमनकारी नीतियों से भारत की जनता में व्यापक असन्तोष फैल गया.

 

लॉर्ड डलहौजी, 1848-1856 (Lord Dalhousie) व्यपगत का सिद्धांत (The Doctrine of Lapse)

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