Sunday, January 6, 2019

लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय 1910-1916 (Lord Hardinge II ) आधुनिक भारत

लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय 1910-1916 (Lord Hardinge II, 1910-1916) आधुनिक भारत (MODERN INDIA)

लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय 1910-1916 (Lord Hardinge II, 1910-1916) आधुनिक भारत (MODERN INDIA)

लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय 1910-1916 (Lord Hardinge)

  • लॉर्ड हार्डिंग को भारत आने से पूर्व प्रशासनिक कार्य का विशेष अनुभव नहीं था, परन्तु कूटनीति के क्षेत्र में उसका अनुभव बहुत पर्याप्त था.
  • वह भारतीय आकांक्षाओं के प्रति अत्यंत सहानुभूतिशीत था.
  • अपने कार्यों के कारण उसे भारतीयों को विश्वास प्राप्त था.
  • इसके समय के महत्वपूर्ण कार्य थे ब्रिटेन के राजा जार्ज पंचम का भारत आगमन तथा 12 दिसम्बर, 1911 को दिल्ली में एक भव्य दरबार का आयोजन, जिसे ‘दिल्ली-दरबार‘ के नाम से जाना जाता है.
  • इसी समय बंगाल विभाजन को रद्द करने तथा भारत की राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली स्थानान्तरित करने की घोषणा भी की गई.
  • 23 दिसम्बर, 1912 को दिल्ली में प्रवेश करते समय लॉर्ड हार्डिग पर बम फेका गया जिसमें वे घायल हो गए, परन्तु इसके बाद भी भारतीयों के प्रति इनका व्यवहार पूर्ववत् बना रहा.
  • प्रथम महायुद्ध सितम्बर, 1914 में शुरू हुआ था जिसमें भारतीयों ने बिना किसी शर्त के इंग्लैंड को सहायता प्रदान की.
  • कुल मिलाकर लॉर्ड हार्डिंग का शासन काल काफी लोकप्रिय रहा.

 

लार्ड हार्डिंग, 1844-1848 (Lord Hardinge, 1844-1848) आधुनिक भारत

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लॉर्ड मिण्टो द्वितीय, 1905-1910 (Lord Minto II 1905-1910) आधुनिक भारत

लॉर्ड मिण्टो द्वितीय, 1905-1910 (Lord Minto II 1905-1910) आधुनिक भारत (MODERN INDIA)

लॉर्ड मिण्टो द्वितीय, 1905-1910 (Lord Minto II 1905-1910) आधुनिक भारत (MODERN INDIA)

लॉर्ड मिण्टो द्वितीय

  • लॉर्ड मिण्टो का जीवन कई विभिन्नताओं का मिश्रण था.
  • उसने अफगान युद्ध में भाग लिया तथा कनाडा के गवर्नर-जनरल के रूप में 1898 से 1904 तक कार्य किया.
  • मिण्टो को बंगाल विभाजन के कारण उत्पन्न अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा.
  • उसके शासनकाल में अंग्रेजी माल का बहिष्कार, हत्याएं, डकैतियां आदि अनेक घटनाएं घटित हुई जिन सबका उद्देश्य देश में ब्रिटिश साम्राज्यवादियों को डराना था.
  • सरकार ने आंदोलन को रोकने के लिए 1908 तथा 1910 के अधिनियम पास कर बहुत से कड़े कानुन बनाये.
  • लॉर्ड मिण्टो के समय की प्रमुख घटनाएं इस प्रकार थी –
  1. 1907 में आंग्ल-रूसी प्रतिनिधि सम्मेलन हुआ था. जिसके द्वारा इंग्लैण्ड तथा रूस के मध्य सभी मतभेद सुलझ गये.
  2. एक प्रमुख घटना 1909 में इण्डियन कौंसिल अधिनियम स्वीकृत हुआ. इसमें विधान सभाओं के गैर-सरकारी सदस्यों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ उनके अधिकार भी बढ़ाए गये.

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Friday, December 28, 2018

लॉर्ड कर्जन, 1899-1905 (Lord Curzon) | बंगाल विभाजन, 1905

लॉर्ड कर्जन, 1899-1905 (Lord Curzon, 1899-1905) बंगाल विभाजन, 1905 आधुनिक भारत (MODERN INDIA)

लॉर्ड कर्जन, 1899-1905 (Lord Curzon)

  • 1899 में लॉर्ड एलगिन के उत्तराधिकारी के रूप में लॉर्ड कर्जन को भारत का गवर्नर जनरल नियुक्त किया गया.
  • लॉर्ड कर्जन के समक्ष प्रमुख चुनौती भारत की प्रशासनिक व्यवस्था को पूर्णरूपेण सुधारना था.
  • उसने इस चुनौती का सफलतापूर्वक सामना करते हुए भारतीय प्रशासन में निम्नलिखित सुधार किए

लॉर्ड कर्जन, 1899-1905 (Lord Curzon, 1899-1905) बंगाल विभाजन, 1905 आधुनिक भारत (MODERN INDIA)

लॉर्ड कर्जन के सुधार

पुलिस सुधार (Police Reforms)

  • लॉर्ड कर्जन ने 1902 में सर एण्ड्रयूफ्रेजर की अध्यक्षता में प्रत्येक प्रान्त के पुलिस प्रशासन की जांच पड़ताल हेतु एक आयोग गठित किया.
  • 1903 में आयोग द्वारा प्रस्तुत सुझावों में सभी स्तरों के कार्मिकों के वेतन में वृद्धि, कार्मिकों की संख्या में वृद्धि, सिपाहियों तथा पदाधिकारियों के प्रशिक्षण हेतु पुलिस विद्यालयों की स्थापना करना, ऊंचे पदों के लिए सीधी भर्ती, प्रान्तीय पुलिस सेवा की स्थापना और एक निदेशक के अधीन केन्द्रीय गुप्तचर विभाग की स्थापना इत्यादि सुझाव सम्मिलित थे.
  • इन सुझावों में से अधिकतर को स्वीकार कर लिया गया.

शैक्षणिक सुधार (Educational Reforms)

  • 1902 में लॉर्ड कर्जन ने भारतीय विश्वविद्यालयों की स्थिति का निरीक्षण करने और उनकी कार्यक्षमता में सुधार हेतु सुझाव देने के लिए एक आयेाग की नियुक्ति की.
  • आयोग के सुझावों के आधार पर 1904 में भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम पारित किया गया.
  • इस अधिनियम के द्वारा विश्वविद्यालयों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ा दिया गया.
  • इस अधिनियम के बाद गैर सरकारी कॉलेजों का विश्वविद्यालयों से सम्बन्धित होना अधिक कठिन हो गया.

वित्तीय सुधार (Financial Reforms)

  • 1899-1900 की अवधि में दक्षिणी, मध्य और पश्चिमी भारत में दुर्भिक्ष और सूखे के कारण कर्जन ने इस स्थिति से निपटने के लिए किए गए.
  • राहत कार्यों का मूल्यांकन करने के लिए सर एण्टनी मैकडौनल की अध्यक्षता में एक आयोग गठित किया.
  • 1901 में भारतीय सिंचाई व्यवस्था के अध्ययन हेतु सर कॉलिन स्कॉट मॉन क्रीफ की अध्यक्षता में एक आयोग गठित किया गया.
  • आयोग ने साढे चार करोड़ रुपये आगामी 20 वर्षों में सिंचाई व्यवस्था पर व्यय किए जाने का सुझाव दिया.
  • आयोग की सिफारिशों के मद्देनज़र झेलम नहर का कार्य पूरा किया गया तथा अपर चिनाब, अपर झेलम और लोअर बारी दोआब नहरों पर निमार्ण कार्य शुरू किया गया.
  • इसके अलावा 1900 में पंजाब भूमि अन्याक्रमण अधिनियम (Punjab Land Alienation Act) पारित किया गया.
  • इसके द्वारा कृषकों की भूमि का गैर-कृषकों के पास हस्तान्तरित होना समाप्त हो गया.
  • 1904 में सहकारी समिति अधिनियम (Cooperative Credit Societies Act) पारित किया गया.
  • इसके द्वारा कृषकों को कम दर पर ऋण मिलना सुलभ हो गया.
  • भारत के औद्योगिक और वाणिज्यिक हितों की देखरेख के लिए एक नए विभाग का गठन किया गया.
  • इस विभाग को डाक-तार कारखानों, रेलवे प्रशासन, खानों तथा बन्दरगाहों की देख-रेख का अतिरिक्त कार्य भार भी सौंपा गया.
  • 1899 में भारतीय टंकण तथा पत्र मुद्रा अधिनियम (Indian Coinage and Paper Currency Act) पारित किया गया.
  • इस अधिनियम के द्वारा अंग्रेजी पौण्ड भारत में विधिमान्य मुद्रा बन गई.
  • इसका मूल्य 15 रुपये निश्चित हुआ.

न्यायिक सुधार (Judicial Reforms)

  • लॉर्ड कर्जन ने कलकत्ता उच्च न्यायालय की कार्यकुशलता में वृद्धि के लिए उसके न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि कर दी.
  • उसने उच्च न्यायालयों के और अधीनस्थ न्यायालयों के न्यायाधीशों के वेतन और पेंशन में भी वृद्धि की.

सैनिक सुधार (Military Reforms)

  • लॉर्ड कर्जन ने भारतीय सेना को दो कमानों में बांट दिया-
  1. उत्तरी कमान, इसका मुख्य कार्यालय मरी में और प्रहार केन्द्र (Striking Point) पेशावर में था.
  2. दक्षिणी कमान, इसका मुख्य कार्यालय पूना में और प्रहार केन्द्र क्वेटा में था.
  • इन दोनों कमानों में तीन-तीन ब्रिगेडियर होते थे.
  • इन ब्रिगेडियरों में दो-दो स्थानीय और एक-एक अंग्रेजी बटालियनों का था.
  • सैनिक अधिकारियों के प्रशिक्षण हेतु इंग्लैण्ड के केम्बरले कॉलेज (Camberley College) की तर्ज पर एक कॉलेज क्वेटा में स्थापित किया गया.

कलकत्ता निगम अधिनियम, 1899 (Calcutta Corporation Act, 1899)

  • इस अधिनियम के द्वारा स्थानीय स्वशासन के क्षेत्र में लॉर्ड रिपन द्वारा किए गए समस्त उत्तम कार्यों को लॉर्ड कर्जन ने कार्यकुशलता की आड़ में समाप्त कर दिया.
  • इस अधिनियम के अनुसार, निगम में चुने हुए सदस्यों की संख्या कम कर दी.
  • निगम और उसकी अन्य समितियों में अंग्रेजों की संख्या बढ़ा दी गई.
  • इस प्रकार निगम एक आंग्ल-भारतीय सभा के रूप में परिवर्तित हो गया.

प्राचीन स्मारक परिरक्षण अधिनियम 1904 (Ancient Monuments Act, 1904)

  • लॉर्ड कर्जन ने भारत के प्राचीन स्मारकों की मरम्मत, प्रत्यास्थापन एवं रक्षण के लिए 1904 में एक महत्वपूर्ण अधिनियम पारित किया.
  • उसने भारतीय रियासतों को भी इस प्रकार के महत्वपूर्ण अधिनियम पारित करने के लिए बाध्य किया.

बंगाल विभाजन, 1905 (Partition of Bengal, 1905)

  • लॉर्ड कर्जन के शासनकाल की सर्वाधिक अप्रिय घटना बंगाल का विभाजन था.
  • तत्कालीन बंगाल प्रान्त में बंगाल, बिहार और उड़ीसा सम्मिलित थे.
  • इसका क्षेत्रफल 189,000 वर्ग मील था.
  • यहां लगभग 8 करोड़ जनसंख्या निवास करती थी.
  • लॉर्ड कर्जन ने पुर्नसंरचना के नाम पर अपने राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए बंगाल का विभाजन कर दिया.
  • विभाजन के बाद पूर्वी बंगाल और असम को मिलाकर एक नया प्रान्त बनाया गया.
  • जिसमें राजशाही, चटगांव और ढाका के तीन डिवीजन सम्मिलित थे.
  • दूसरी ओर एक अन्य प्रान्त पश्चिमी बंगाल, जिसमें बिहार और उड़ीसा सम्मिलित थे, अस्तित्व में आया.
  • पूर्वी बंगाल का मुख्य कार्यालय ढाका में था और यह एक लेफ्टिनेंट के अधीन था.
  • इसमें एक करोड़ अस्सी लाख मुसलमान और एक करोड़ बीस लाख हिन्दू निवास करते थे.
  • पश्चिमी बंगाल में चार करोड़ बीस लाख हिन्दू और मात्र 90 लाख मुसलमान निवास करते थे.
  • शीघ्र ही कर्जन की यह राजनीतिक चाल जगजाहिर हो गई कि बंगाल का विभाजन हिन्दू-मुस्लिम वैमनस्य को बढ़ावा देने के लिए किया गया है.
  • लॉर्ड कर्जन के इस कार्य का तीव्र विरोध हुआ.
  • 1911 में यह विभाजन रद्द कर दिया गया.

लॉर्ड कर्जन की विदेश नीति (The Foreign Policy of Lord Curuon)

  • लॉर्ड कर्जन एक साम्राज्यवादी गवर्नर जनरल था.
  • उसने एशिया के अन्य देशों के प्रति अपनी नीति को स्पष्ट करते हुए कहा था कि हम इन देशों पर अपना अधिकार नहीं करना चाहते, किन्तु हम यह भी नहीं चाहेंगे कि कोई अन्य शक्ति इन क्षेत्रों पर अपना प्रभाव स्थापित करे.
  • लॉर्ड कर्जन के इस कथन के परिप्रेक्ष्य में उसकी विदेश नीति का अध्ययन किया जा सकता है.

फारस की खाड़ी के प्रति नीति

  • फारस की खाड़ी में स्थित अंग्रेजी रेजिडेन्ट खाड़ी देशों के आपसी विवादों में मध्यस्थता का कार्य करते थे.
  • अंग्रेजों की फारस की खाड़ी में साम्राज्य विस्तार की कोई योजना नहीं थी, किन्तु उन्हें यह स्वीकार्य नहीं था कि कोई अन्य शक्ति इस प्रदेश में अपना प्रभुत्व स्थापित करे.
  • 19वीं शताब्दी के अंतिम वर्षों में रूस, फ्रांस, जर्मनी और तुर्की ने इस क्षेत्र पर अपना-अपना प्रभुत्व स्थापित करने के लिए अभियान आरम्भ कर दिए, किन्तु लॉर्ड कर्जन ने शीघ्र ही फ्रांस, रूस, जर्मनी और तुर्की के इन अभियानों को निष्फल कर दिया और नवम्बर-दिसम्बर, 1903 तक पुनः इस क्षेत्र में अपना प्रभुत्व स्थापित कर लिया.

तिब्बत के प्रति नीति

  • लॉर्ड कर्जन के भारत आगमन तक आंग्ल-तिब्बत संबंध गतिरोध की स्थिति में पहुंच चुके थे.
  • एक तरफ चीनी प्रभुसत्ता को तिब्बत स्वीकार नहीं करता था दूसरी ओर तिब्बत पर रूस का प्रभाव बढ़ता जा रहा था.
  • लॉर्ड कर्जन ने तिब्बत पर रूसी प्रभाव को समाप्त करने के लिए सितम्बर, 1904 में तिब्बत को अपने प्रभुत्व में ले लिया.
  • इस पराजय के बाद तिब्बत को युद्ध क्षति के रूप में एक लाख रुपये वार्षिक की दर से 75 लाख रुपये देने थे.
  • इसकी जमानत के रूप में अंग्रेजों ने सिक्किम और भूटान के मध्य स्थित चुम्बीघाटी को अपने अधिकार में ले लिया.
  • इसके अलावा यह भी निश्चय हुआ कि तिब्बत इंग्लैंड के अलावा किसी अन्य विदेशी शक्ति को रेलवे, सड़के और तार इत्यादि की स्थापना में रियायतें नहीं देगा.
  • भारत सचिव के भारी दबाव के कारण 1908 में चुम्बीघाटी पर से ब्रिटिश नियंत्रण उठा लिया गया.

कर्जन-किचनर विवाद (Curzon-Kitchener Controversy)

  • वायसराय की परिषद् में सैनिक विभाग की ओर से दो अधिकारी होते थे- 
  1. प्रधान सेनापति, जो सेना का प्रशासक और मुखिया होता था.
  2. साधारण कार्यकारी पार्षद या सैनिक सदस्य, जो सेना के प्रशासन का कार्यवाहक होता था. वह गवर्नर जनरल को सैनिक मामलों में मंत्रणा भी देता था.
  • 1902 में लॉर्ड किचनर को भारत का प्रधान सेनापति बनाया गया.
  • लॉर्ड किचनर सैनिक सदस्य के पद का उन्मूलन करके उसके सभी कार्य अपने अधिकार में लेना चाहता था, लेकिन लॉर्ड कर्जन ने इसका तीव्र विरोध किया.
  • यह विवाद बढ़ता ही गया और अंत में यह तय हुआ कि सैनिक सदस्य का पद समाप्त नहीं किया जाएगा किन्तु यह पद अब सैनिक सम्भरण सदस्य का कर दिया गया जिसका मुख्य कार्य असैनिक था सैनिक नहीं.
  • मुख्य सैनिक कार्य अब प्रधान सेनापति के अधीन कर दिए गए.

मूल्यांकन (Evaluation)

  • लॉर्ड कर्जन एक सामाज्यवादी गवर्नर जनरल था.
  • उसकी ह एवं विदेश नीतियां केवल इस भावना से प्रेरित थी कि भारत में अंग्रेजों की स्थिति को अधिकाधिक सुदृढ़ बनाया जाए.
  • वह रूस, जर्मनी और फ्रांस के फार की खाड़ी में बढ़ते हुए प्रसार को रोकने में सफल रहा.
  • वह शिक्षा पर अत्यधिक सरकारी नियंत्रण का पक्षपाती थी.
  • उसने सिंचाई, धूमिकर, कृषि, रेलवे, राजस्व और मुद्रा टंकण संबंधी आर्थिक नीतियों में दक्षता पर अधिक तथा जनता की दयनीय स्थिति को सुधारने पर कम बल दिया.
  • उसके साम्राज्यवादी उद्देश्यों से भारत में राजनीतिक अशान्ति बढ़ी.
  • अगस्त, 1905 में उसने त्यागपत्र दे दिया.

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लॉर्ड एलगिन द्वितीय, 1894-99 (Lord Elgin-II, 1894-99) आधुनिक भारत

लॉर्ड एलगिन द्वितीय, 1894-99 (Lord Elgin-II, 1894-99) आधुनिक भारत (MODERN INDIA)

लॉर्ड एलगिन द्वितीय, 1894-99 (Lord Elgin-II, 1894-99) आधुनिक भारत (MODERN INDIA)

लॉर्ड एलगिन द्वितीय, 1894-99 (Lord Elgin-II)

  • लॉर्ड एलगिन के समय में देश को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा.
  • जिनमें अकाल, प्लेग तथा सीमान्त युद्ध प्रमुख थे.
  • 1897 में अंग्रेजों की गतिविधियों से सन्देह उत्पन्न होने के कारण अफ़रीदियों ने दर्रा लैबर बन्द कर दिया तथा आंदोलन शुरू कर दिया.
  • दो बार सेना भेजने के बाद विद्रोहियों को शान्त किया जा सका.
  • 1896 में पूना तथा बंबई के आस-पास जरदस्त प्लेग फैला, जिससे अत्यधिक जन-हानि हुई.
  • सरकार ने उसे नियंत्रित करने के लिए जो कार्यवाहिया की उनसे जनता में अनेक गलतफहमियां तथा कटुता फैली.
  • फलस्वरूप पूना के प्लेग कमिश्नर रैंड सहित दो अधिकारियों की हत्या कर दी गई.
  • इसी समय 1896 तथा 1898 के वर्षों में पंजाब, उत्तर-प्रदेश, मध्य-प्रदेश तथा बिहार के कुछ भागों में भयंकर अकाल पड़े.
  • 1898 में इस संबन्ध में जांच हेतु एक आयोग नियुक्त किया गया.
  • 1893 में एक अफीम आयोग नियुक्त किया गया जिसका काम अफीम के प्रयोग का जनता के स्वास्थ्य पर प्रभाव के सम्बन्ध में जांच करना तथा सरकार को रिपोर्ट करना था.
  • अफीम पर सरकारी नियंत्रण था तथा सरकार इसका चीन को निर्यात करके अत्यधिक लाभ अर्जित कर रही थी.
  • इस प्रथा का विरोध कर आयोग ने अपनी रिपोर्ट में अफीम के बुरे प्रभावों का विस्तृत वर्णन किया था.
  • परिणामस्वरूप चीन को भेजी जाने वाली अफीम को कम किया गया.
  • सेना में सुधार किया गया.
  • पूर्व में तीन प्रैजिडेन्सियों के पृथक मुख्य सेनापति होते थे.
  • नये प्रबन्धानुसार एक मुख्य सेनापति रखने व उसके अधीन विभिन्न प्रान्तों में सहायक जनरल रखने का प्रावधान किया गया.

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लॉर्ड लैन्सडौन, 1888-93 (Lord Lansdowne, 1888-93) आधुनिक भारत

लॉर्ड लैन्सडौन, 1888-93 (Lord Lansdowne, 1888-93) आधुनिक भारत (MODERN INDIA)

लॉर्ड लैन्सडौन, 1888-93 (Lord Lansdowne, 1888-93) आधुनिक भारत (MODERN INDIA)

लॉर्ड लैन्सडौन, 1888-93 (Lord Lansdowne)

  • लॉर्ड लैन्सडौन के शासनकाल में 1892 में प्रसिद्ध कौसिल अधिनियम स्वीकार हुआ.
  • इसके अधीन लेजिस्लेटिव कौंसिलों के कार्य और अधिकार बढ़ाये गए और इम्पीरियल लेजिस्लेटिव कौंसिल तथा प्रान्तीय लेजिस्लेटिव कौंसिलो के सदस्यों की संख्या बढ़ा दी गयी.
  • इस एक्ट के द्वारा चैम्बर्स ऑफ कामर्स, विश्वविद्यालयों, जमीदारों और म्यूनिस्पेलिटीज को अपने प्रतिनिधि चुनने का हक दिया गया.
  • 1881 के कारखाना अधिनियाम पर अनेक सुधार संशोधन किए गए.
  • इसके तहत स्त्रियों के लिए काम के घंटे दिन में 11 सीमित कर दिये गये.
  • काम करने वाले बच्चों की कम से कम आयु 7 वर्ष से 9 वर्ष कर दी गई, तथा उनके कार्य के घण्टे 7 निश्चित कर दिये गये.
  • बच्चों के लिए रात्रि में कार्य करना पूर्ण रूप से प्रतिबन्धित कर दिया गया.

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लॉर्ड डफरिन, 1884-88 (Lord Dufferin, 1884-88) आधुनिक भारत

लॉर्ड डफरिन, 1884-88 (Lord Dufferin, 1884-88) आधुनिक भारत (MODERN INDIA)

लॉर्ड डफरिन, 1884-88 (Lord Dufferin, 1884-88) आधुनिक भारत (MODERN INDIA)

लॉर्ड डफरिन, 1884-88 (Lord Dufferin)

  • भारत का गवर्नर जनरल बनने से पूर्व लॉर्ड डफरिन तुर्की तथा रूस में ब्रिटिश राजदूत में रह चुका था.
  • 1872 से 1878 तक वह कैनेडा का गवर्नर जनरल भी रहा था.
  • डफरिन के शासनकाल की महत्वपूर्ण घटना 1885-88 का तृतीय आंग्ल-बर्मा युद्ध था, जिसमें बर्मा की पराजय हुई थी.
  • 1885 में ही ए. ओ. ह्युम द्वारा भारतीय राष्ट्रीय काग्रेस की स्थापना की गई.
  • लॉर्ड डफरिन के शासनकाल में अर्थात 1885-86 और 87 में क्रमशः बंगाल किराया अधिनियम, अवध किराया अधिनियम तथा पंजाब किराया अधिनियम पास हुए.

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Wednesday, December 26, 2018

लॉर्ड रिपन, 1880-1884 (Lord Ripon) आधुनिक भारत

लॉर्ड रिपन, 1880-1884 (Lord Ripon, 1880-1884) आधुनिक भारत (MODERN INDIA)

लॉर्ड रिपन, 1880-1884 (Lord Ripon)

  • लॉर्ड रिपन 1880 में भारत का गवर्नर जनरल बना.
  • उसने भारत के प्रति अपनी नीति का इन शब्दों में वर्णन किया.
  • भारत में रहने का हमारा अधिकार इस तर्क पर आधारित है कि भारत में हमारा शासन भारतीयों के लिए हितकर हो.
  • साथ ही भारतीय भी यह अनुभव करें कि यह उनके लिए हितकर है.
  • लॉर्ड रिपन ने लॉर्ड लिटन की दमनकारी नीतियों से घायल भारत के घावों को भरने का प्रयास किया.
  • उसने स्थानीय स्वशासन की योजना निर्धारित की और भारत में प्रतिनिधि संस्थाओं की नीव डाली.

लॉर्ड रिपन, 1880-1884 (Lord Ripon, 1880-1884) आधुनिक भारत (MODERN INDIA) इलबर्ट बिल विवाद

भारतीय भाषा समाचार पत्र अधिनियम को रद्द करना (Repeal of the Vernacular Press Act)

  • समाचार पत्रों कि स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने वाले इस घृणित अधिनियम को लॉर्ड रिपन ने 1882 में रद्द कर दिया.
  • उसने भारतीय भाषा के समाचार पत्रों को अंग्रजी भाषा के समाचार पत्रों के समान स्वतंत्रता दे दी.
  • किन्तु सरकार ने समुद्र आशुल्क अधिनियम (Sea Customs Act) के माध्यम से प्रैस पर कुछ अंकुश बनाए रखा.

पहला फैक्टरी एक्ट, 1881 (The First Factory Act, 1881)

  • लॉर्ड रिपन ने भारतीय मिल मजदूरों की शोचनीय स्थिति को सुधारने के लिए प्रथम फैक्टरी एक्ट पारित करवाया.
  • यह एक्ट उन कारखानों पर लाग किया गया जिनमें 100 से अधिक श्रमिक कार्य करते थे.
  • इस एक्ट की व्यवस्थाओं के अनुसार सात वर्ष से कम आयु के बच्चों से कारखानों में काम नहीं करवाया जा सकता था.
  • 12 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए काम के घटे निर्धारित किए गए.

वित्तीय विकेन्द्रीयकरण, 1882 (Financial Decentralization, 1882)

  • लॉर्ड रिपन ने लॉर्ड मेयो द्वारा प्रतिपादित वित्तीय विकेन्द्रीयकरण की नीति को जारी रखा.
  • उसने प्रान्तों का आर्थिक उत्तरदायित्व बढ़ाने के लिए कर के साधनों को निम्नलिखित तीन भागों में बांट दिया—

साम्राज्यीय मदें (Imperial Heads)

  • इसमें सीमा शुल्क, डाक तार, रेलवे, अफीम, नमक, टकसाल, सैनिक, आय और भूमिकर आदि रखे गए.

प्रान्तीय मदें (Provincial Heads)

  • इसमें स्थानीय महत्व की मदें जैसे- जेलों, चिकित्सा सेवाओं, मुद्रण, राजमार्ग और सामान्य प्रशासन आदि आती थी.
  • इनसे प्राप्त समस्त आय प्रान्तीय सरकारों को दी जाती थी.

विभाजित मदें (Divided Heads)

  • इसमें आबकारी कर, स्टाम्प कर, जल, पंजीकरण शुल्क आदि में सम्मिलित थी.
  • इनसे प्राप्त आय प्रान्तीय और केन्द्रीय सरकारों के मध्य बराबर बराबर बांट दी जाती थी.

स्थानीय स्वशासन की स्थापना (Establishinent of Local Self Government LSG)

  • भारत में लॉर्ड रिपन को स्थानीय स्वशासन का पिता कहा जाता है.
  • लॉर्ड रिपन के शासन काल का सबसे महत्वपूर्ण कार्य स्थानीय स्वशासन पर 1882 का सरकारी प्रस्ताव था.
  • इस प्रस्ताव के द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय बेड की स्थापना की गई.
  • प्रत्येक जिले में जिला उपविभाग, तालुका या तहसील बोर्ड की स्थापना की गई.
  • नगरों में नगरपालिकाएं स्थापित की गई.
  • इन स्थानीय संस्थाओं को निश्चित कार्य तथा आय के साधन दिए गए.
  • इन संस्थाओं में गैर सरकारी सदस्यों की संख्या अधिक होती थी.
  • इन संस्थाओं के संबंध में हस्तक्षेप बहुत कम कर दिया गया.
  • यह आशा की गई कि सरकार इन संस्थाओं को आज्ञादे बल्कि इनका उचित मार्ग दर्शन करे.
  • इन संस्थाओं के अध्यक्ष सरकारी अधिकारी नहीं होते थे वरन् इनके सदस्यों द्वारा चुने जाते थे.
  • किन्तु कुछ कार्यों के संबंध में सरकारी अनुमति आवश्यक होती थी.
  • ये कार्य थे-ऋण लेना, किसी कार्य पर निश्चित राशि से अधिक व्यय, प्राधिकृत मदों से भिन्न पदों पर कर लगाना और नगरपालिका की सम्पत्ति को बेचना आदि.

भूमिकर व्यवस्था पर प्रस्ताव (Resolution on Land Revenue)

  • लार्ड कॉर्नवालिस ने 1793 में बंगाल में जिस भूमिकर व्यवस्था को स्थापित किया उसमें लार्ड रिपन ने कुछ सुधार करने का निश्चय किया.
  • लार्ड रिपन किसानों को उनकी भूमि के संबंध में स्थाई अधिकार दिलवाना चाहता था.
  • वह कृषकों को यह भी आश्वासन देना चाहता था कि सरकार भूमिकर केवल भूमि के मूल्य की वृद्धि की अवस्था में ही बढ़ाएगी.
  • किन्तु बंगाल के जमींदारों ने इसका उग्र विरोध किया.
  • भारत सचिव भी लार्ड रिपन को उक्त योजनाओं से सहमत न हो सका.
  • अतः यह योजना क्रियान्वित न हो सकी.

शैक्षणिक सुधार (Educational Reforms) हन्टर आयोग

  • 1854 के वुड-निर्देशपत्र (wood’s Despatch) के पश्चात् शिक्षा के क्षेत्र में हुई प्रगति का पुनर्विलोकन करने के लिए 1882 में सर विलियम हन्टर की अध्यक्षता में एक आयोग गठित किया गया.
  • हन्टर आयोग ने सरकार के प्रारभिक शिक्षा के प्रसार और उन्नति के उत्तरदायित्व पर जोर दिया.
  • हन्टर आयोग ने यह भी सुझाव दिया कि यह कार्य नव स्थापित स्थानीय संस्थाओं को सौंप दिया जाए.
  • इन संस्थाओं पर सरकार कड़ी निगरानी रखे.
  • माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में दो प्रकार की पद्धतियों का सुझाव दिया गया —
  1. साधारण साहित्यिक शिक्षा जिसमें विद्यार्थियों को प्रवेशिका परीक्षा के लिए तैयार किया जाए.
  2. तह वाणिज्यिक शिक्षा जो विद्यार्थियों को वाणिज्यिक और उपव्यवसायिक जीवनयापन के लिए तैयार कर सके.
  • हन्टर आयोग ने सहायक अनुदान व्यवस्था का समर्थन किया.
  • हन्टर आयोग ने स्त्री शिक्षा पर भी जोर दिया.

इलबर्ट बिल विवाद, 1883-84 (The Ilbert Bill Controversy, 1883-84)

  • सर पी. सी. इलबर्ट वाइसराए की परिषद् के विधि सदस्य थे.
  • 2 फरवरी, 1883 को उन्होंने विधान परिषद् में एक प्रस्ताव (बिल) प्रस्तुत किया.
  • यह बिल इलबर्ट बिल के नाम से प्रसिद्ध है.
  • इस बिल का उद्देश्य यह था कि जाति – भेद पर आधारित सभी न्यायिक आयोग्यताएं तुरन्त समाप्त कर दी जाएं और भारतीय तथा यूरोपीय न्यायाधीशों को समान शक्ति प्रदान की जाएं.
  • इलबर्ट बिल को यूरोपीय लोगों ने अपने विशेषाधिकारों पर कुठारधात बतलाया.
  • यूरोपीय लोग भारतीयो से दासो जैसा व्यवहार करते थे.
  • विरोध करने पर प्रायः इन्की हत्या तक कर दी जाती थी.
  • इन तथाकथित यूरोपीय स्वामियों को यूरोपीय न्यायाधीश बिना दण्ड के ही अथवा थोड़ा सा दण्ड देकर छोड़ देते थे.
  • इलबर्ट बिल से यूरोपीय लोगों और न्यायाधीशों की इस मनमानी पर अंकुश लग जाता.
  • अतः इस बिल का तीव्र विरोध हुआ. इस बिल को रद्द करने के लिए लॉर्ड रिपन पर भारी दबाव पड़ने लगा.
  • अन्ततः इस बिल के संबंध में एक समझौता हो गया जिससे इस बिल का मूल उद्देश्य समाप्त हो गया.
  • उक्त समझौते के अनुसार 26 जनवरी, 1884 को एक नया प्रस्ताव स्वीकार किया गया.
  • इसके अनुसार यदि यूरोपीय लोगों के मुकदमे दण्डनायकों या सेशन जजों के सामने आए तो वे लोग (यूरोपीय लोग) 12 व्यक्तियों की शपथ जन (Jury) द्वारा मुकदमें की सुनवाई की मांग कर सकते थे.
  • इन 12 व्यक्तियों में कम से कम सात का यूरोपीय अथवा अमेरिकन होना अनिवार्य था.

मूल्यांकन (Evaluation)

  • लॉर्ड रिपन को प्रायः “भारत के उद्धारक” को संज्ञा दी जाती है.
  • उसके शासन काल को भारत में स्वर्ण युग के आरंभ की संज्ञा दी जाती है.
  • रिपन को भारत में स्थानीय स्वशासन का जनक भी कहा जाता है.
  • लॉर्ड रिपन ने 1831 में विलियम बैंटिक द्वारा मैसूर के प्रति किए गए अन्याय को समाप्त करने की भावना से मैसूर के स्वर्गवासी राजा के दत्तक पुत्र को मैसूर पुनः लौटाकर अपनी उदारता का परिचय दिया.
  • 1882 में लॉर्ड रिपन ने अपने कार्यकाल की समाप्ति से पूर्व ही अपना त्यागपत्र दे दिया.

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