Friday, January 25, 2019

नेहरु रिपोर्ट (Nehru Report) भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन (Indian National Movement)

नेहरु रिपोर्ट (Nehru Report in hindi) भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन (Indian National Movement)

नेहरु रिपोर्ट (Nehru Report) भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन (Indian National Movement)

  • ब्रिटिश कैबिनेट के अनुदार दल के भारत मंत्री लार्ड बर्केनहेड ने 24 नवम्बर, 1027 में भारतीयों के सामने यह चुनौती रखी कि वे एक ऐसे संविधान का निर्माण कर ब्रिटिश संसद के समक्ष पेश करें जिससे सारे भारतीय संतुष्ट हों.
  • उनका मानना था कि भारत की भिन्न परिस्थितियों में यह संभव नहीं है.
  • अत: विभिन्न पार्टियों तथा संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने ‘सर्वदलीय सम्मेलन’ का आयोजन कर सांविधानिक सुधारों की रूप-रेखा बनाने का प्रयास किया.
  • सभी पक्ष इस बात पर सहमत थे कि ‘पूर्ण उत्तरदायी शासन’ को आधार बनाकर नया संविधान बनाया जाए.
  • मई, 1928 में पुनः सर्वदलीय सम्मेलन बुलाया गया जिसमें संविधान का ड्राफ्ट बनाने के लिए पंडित मोतीलाल नेहरु की अध्यक्षता में एक समिति नियुक्त की गई.
  • इस समिति के अन्य सदस्य थे-
  1. अली इमाम,
  2. सुएव कुरेशी (मुस्लिम),
  3. एम. एस. एने,
  4. एम. आर. जेकर (हिन्दू महासभा),
  5. मंगल सिंह (सिख लीग),
  6. तेज बहादुर सप्रू (लिबल्स),
  7. एन. एम. जोशी (लेबर),
  8. जी. पी. प्रधान (नॉन-ब्राह्मण) तथा
  9. पं. जवाहर लाल नेहरु जो कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव थे.
  • नेहरु समिति ने अपनी रिपोर्ट अगस्त, 1928 में पेश की जिसे नेहरु रिपोर्ट कहा गया.
  • नेहरु रिपोर्ट की कुछ सिफारिशें विवादास्पद थी.
  • दुर्भाग्य से कलकत्ता में दिसम्बर, 1928 में आयोजित सर्वदलीय सम्मेलन रिपोर्ट को स्वीकार न कर सका.
  • मुस्लिम लीग, हिंदू महासभा और सिख लीग के कुछ साम्प्रदायिक रुझान वाले नेताओं ने इसे लेकर आपत्तियां कीं.
  • इस तरह सांप्रदायिक दलों ने राष्ट्रीय एकता का दरवाजा बंद कर दिया.
  • इसके बाद लगातार साम्प्रदायिक भावनाएं विकसित होती गई.
  • पंडित जवाहरलाल नेहरु, सुभाष चन्द्र बोस तथा अनेकों अन्य युवा राष्ट्रवादी भी नेहरु रिपोर्ट से पूर्णतया सहमत नहीं थे.
  • ये लोग औपनिवेशिक शासन के विपरीत पूर्ण-स्वाधीनता के पक्ष में थे.
  • अतः दिसम्बर, 1928 में आयोजित सर्वदलीय सम्मेलन रिपोर्ट को स्वीकार न कर सका.

क्रान्तिकारी-आतंकवाद का दूसरा चरण (Second Phase of Revolutionary Terrorism) 

साइमन कमीशन (Simon Commission)

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साइमन कमीशन (Simon Commission) भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन

साइमन कमीशन (Simon Commission) भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन (Indian National Movement)

साइमन कमीशन (Simon Commission in Hindi)

साइमन कमीशन (Simon Commission) भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन (Indian National Movement)

साइमन कमीशन का गठन और उद्देश्य

  • साइमन कमीशन के गठन के बाद आंदोलन के इस नए चरण को बल मिला.
  • 1919 के भारतीय शासन अधिनियम की अन्तिम धारा में कहा गया था कि भारत में संवैधानिक सुधारों की छानबीन के लिए ब्रिटिश संसद दस वर्ष बाद एक शाही आयोग नियुक्त करेगी.
  • इसलिए सर जॉन साइमन की अध्यक्षता में 8 नवम्बर, 1927 को ब्रिटिश संसद द्वारा एक आयोग या कमीशन नियुक्त किया गया, जिसे ‘साइमन कमीशन’ कहा गया.
  • इसका उद्देश्य आगे सांविधानिक सुधार के प्रश्न पर विचार करना था.

साइमन वापस जाओ (Simon go back)

  • साइमन कमीशन के सभी सदस्य अंग्रेज थे.
  • जिस कारण सम्पूर्ण देश में सभी लोगों द्वारा इसका बहिष्कार हुआ.
  • 7 फरवरी, 1928 को आयोग के बम्बई उतरने से लेकर, जब तक आयोग भारत में रहा उसका सभी जगह हड़तालों, काले झण्डों और ‘साइमन वापस जाओ’ (साइमन गो बैक) आदि के नारों से स्वागत हुआ.
  • जब यह कमीशन लाहौर पहुंचा वहां लाला लाजपत राय ने एक विशालकाय विरोध जुलूस लिकाला.
  • पुलिस अधिकारी साण्डर्स के इशारे पर जुलूस पर लाठीचार्ज किया गया.
  • जिसमें लाला लाजपत राय गम्भीर रुप से घायल हो गये और बाद में उनका देहान्त हो गया.

सामइन कमीशन रिपोर्ट की सिफारिशें

  • मई, 1930 में प्रकाशित सामइन कमीशन रिपोर्ट की मुख्य सिफारिशें इस प्रकार थी –
  1. प्रान्तों में वैध शासन को समाप्त करके उत्तरदायी शासन स्थापित कर दिया जाए.
  2. भारत के लिए संघ शासन की स्थापना की जाए.
  3. अल्पसंख्यकों के हितों के लिए गर्वनरों तथा गवर्नर जनरल को विशेष शक्तियाँ प्रदान की जाएं.
  4. मताधिकार का विस्तार करने अर्थात् इसे 2.8 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ाने की बात कही गई.
  5. रिपोर्ट में कहा गया कि संघ की स्थापना से पहले भारत में एक ‘वृहत्तर भारतीय परिषद्’ की स्थापना की जाए, जिसमें भारत के प्रान्तों और भारतीय रियासतों के प्रतिनिधि शामिल हों. इस परिषद् के माध्यम से प्रान्त व रियासतें अपनी समस्याओं पर विचार-विमर्श करेंगे.
  6. केन्द्रीय शासन के अपरिवर्तित रहने की बात कही गई.
  7. प्रान्तीय विधान मण्डल के सदस्यों की संख्या में वृद्धि करने और सरकारी सदस्यों की व्यवस्था समाप्त करने की बात कही गई.
  8. बर्मा को स्वतंत्र करने की बात कही गई.
  9. 1919 के अधिनियम की यह व्यवस्था कि प्रति 10 वर्ष बाद जांच-पड़ताल के लिए एक समिति नियुक्त हो, को समाप्त करने की बात कही गई. साथ ही नए संविधान को ऐसा लचीला बनाने की बात कही गई कि वह स्वयं ही विकसित होता रहे.
  • सभी महत्वपूर्ण भारतीय नेताओं और दलों ने परस्पर एकजुट होकर तथा संवैधानिक सुधारों की एक वैकल्पिक योजना बनाकर साइमन कमीशन की चुनौती का जवाब देने का प्रयास किया.
  • प्रमुख राजनीतिक कार्यकर्ताओं के अनेक सम्मेलन और संयुक्त बैठकें आयोजित की गई.
  • इसका परिणाम नेहरु रिपोर्ट के रूप में सामने आया.

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Thursday, January 24, 2019

क्रान्तिकारी-आतंकवाद का दूसरा चरण (Second Phase of Revolutionary Terrorism) भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन

क्रान्तिकारी-आतंकवाद का दूसरा चरण (Second Phase of Revolutionary Terrorism) भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन Indian National Movement

क्रान्तिकारी-आतंकवाद का दूसरा चरण (Second Phase of Revolutionary)

  • असहयोग आंदोलन के पूर्णतया असफल होने से आतंकवाद में पुनः उग्रता आई.
  • अक्टूबर, 1924 में समस्त क्रान्तिकारी दलों का कानपुर में एक सम्मेलन बुलाया गया, जिसमें सचिन्द्रनाथ सान्याल, जगदीश चन्द्र चैटर्जी तथा राम प्रसाद बिस्मिल जैसे पुराने क्रान्तिकारी नेताओं तथा भगत सिंह, शिव वर्मा, सुख देव, भगवतीचरण वोहरा तथा चन्द्रशेखर आजाद जैसे युवा क्रान्तिकारियों ने भाग लिया.

क्रान्तिकारी-आतंकवाद का दूसरा चरण (Second Phase of Revolutionary Terrorism) भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन Indian National Movement

भारतीय गणतंत्र समिति अथवा सेना (Hindustan Republican Association or Army)

  • 1924 में ‘भारतीय गणतंत्र समिति अथवा सेना’ (Hindustan Republican Association or Army) का जन्म हुआ तथा बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब तथा मद्रास आदि प्रान्तों में की शाखाएं स्थापित की गई.
  • इस दल (भारतीय गणतंत्र समिति अथवा सेना) के निम्नलिखित तीन प्रमुख आदर्श थे –
  1. भारतीय जनता में महात्मा गांधीजी की अहिंसावाद की नीतियों की निरर्थकता के प्रति जागृति उत्पन्न करना.
  2. पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए प्रत्यक्ष कार्यवाही तथा क्रान्ति की आवश्यकता का प्रदर्शन करना.
  3. अंग्रेजी साम्राज्यवाद के स्थान पर समाजवादी विचारधारा से प्रेरित संयुक्त राज्य भारत में संघीय गणतंत्र की स्थापना करना.

काकोरी षड्यंत्र

  • इन्होंने अपने कार्यों के लिए धन एकत्रित करने हेतु सरकारी कोषों को अपना निशाना बनाने का निश्चय किया.
  • 9 अगस्त, 1925 को क्रान्तिकारियों ने सहारनपुन-लखनऊ लाइन पर काकोरी जाने वाली गाड़ी को सफलतापूर्वक लूटा.
  • इस सम्बन्ध में 1925 में काकोरी षड्यंत्र केस नामक मुकदमा चलाया गया.
  • सत्रह लोगों को लम्बी सजाएं, चार को आजीवन कारावास तथा रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाकुल्लाह तथा रोशनालाल समेत चार लोगों को फांसी दे दी गई.

भगत सिंह और चन्द्र शेखर आजाद 

  • क्रान्तिकारी जल्दी ही समाजवादी विचारों के प्रभाव में आ गये तथा वे अब धीरे-धीरे व्यक्तिगत वीरता के कामों और हिंसात्मक गतिविधियों से भी दूर हटने लगे.
  • परन्तु 30 अक्टूबर, 1928 को साइमन कमीशन विरोधी एक प्रदर्शन पर पुलिस के बर्बर लाठी चार्ज के कारण एक आकस्मिक परिवर्तन आया.
  • इसमें लाठियों की चोट खाकर पंजाब के महान नेता लाला लाजपत राय शहीद हो गये.
  • अतः इसका बदला लेने के लिए भगत सिंह, चन्द्र शेखर आजाद और राजगुरु ने लाहौर के सहायक पुलिस कप्तान साण्डर्स की 17 दिसम्बर, 1928 को हत्या कर दी.
  • पुलिस ने जन-साधारण पर दमन-चक्र चलाया.
  • लोगों में यह भावना सी हो गई कि क्रान्तिकारी तो निकल भागते हैं और जनता पिस जाती है.
  • इस पर भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने केन्द्रीय विधान भवन में 8 अप्रैल, 1929 को खाली बेंचों पर बम मारे और गिरफ्तार हो गए.
  • उनकी इच्छा किसी की हत्या करने की नहीं थी, बल्कि आतंकवादियों के एक पर्चे के अनुसार “बहरों को सुनाना” था.
  • वे जानबूझकर इसलिए गिरफ्तार हुए क्योंकि वे क्रान्तिकारी प्रचार के लिए अदालत को एक मंच के रूप में उपयोग करना चाहते थे.
  • 23 मार्च, 1931 को भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी दे दी गई.

चटगांव सरकारी शास्त्रागार

  • अप्रैल, 1930 में चटगांव के सरकारी शास्त्रागार पर क्रान्तिकारियों ने योजनाबद्ध ढंग से एक बड़ा छापा मारा.
  • इसका नेतृत्व सूर्यसेन ने किया.
  • सूर्यसेन बाद में पकड़े गए और 1933 में फांसी पर लटका दिए गए.
  • क्रान्तिकारी आतंकवाद का आंदोलन बहुत जल्दी समाप्त हो गया, हालांकि इक्कीदुक्की घटनाएं अनेक वर्षों तक जारी रही.
  • चन्द्र शेखर आजाद ने 27 फरवरी, 1931 को इलाहाबाद के एक पार्क में पलिस से मुकाबला करते हुए अन्तिम गोली खुद को मार ली और शहीद हो गए.
  • सरकार ने सैकड़ों अन्य क्रान्तिकारियों को गिरफ्तार कर उन्हें लम्बी-लम्बी सजाएं दी तथा अनेकों की अंडमान की सेलुलर जेल भेज दिया.

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Monday, January 21, 2019

आधुनिक भारत में दलित जातीय आन्दोलन (DEPRESSED CLASS MOVEMENT IN INDIA)

आधुनिक भारत में दलित जातीय आन्दोलन (DEPRESSED CLASS MOVEMENT IN INDIA) आधुनिक भारत (MODERN INDIA)

आधुनिक भारत दलित जातीय आन्दोलन (DEPRESSED CLASS MOVEMENT IN INDIA)

  • 19वीं शताब्दी के सामाजिक और धार्मिक सुधार आन्दोलनों के प्रवर्तक उच्च वर्गीय हिन्दू थे.
  • इन्होंने अस्पृश्यता और जात-पांत की समाप्ति के लिए अनेक प्रयास किए.
  • किन्तु इन्हें अपने प्रयासों में आंशिक सफलता ही मिली.
  • कालान्तर में इन दलित जातियों में से ऐसे नेता उभर कर सामने आए.
  • जिन्होंने स्वयं समानता के अधिकार के लिए आन्दोलन चलाया.

आधुनिक भारत में दलित जातीय आन्दोलन (DEPRESSED CLASS MOVEMENT IN INDIA) आधुनिक भारत (MODERN INDIA)

न्याय दल (The Justice Party) 

  • श्री पी. त्यागराज और डॉ. टी. एम. नैयर के प्रयासों से 1917 में दक्षिण भारतीय उदारवादी संघ या न्याय पार्टी की स्थापना की गई.
  • 1937 में रामास्वामी नाइकर इस दुल के सभापति चुने गए.
  • उन्होंने हिन्दू धर्म की भत्र्सना की और कहा कि यह ब्राह्मणों के अनियंत्रित अधिकारों का पक्षपोषक है.
  • 1949 में इस दल का विभाजन हो गया और असन्तुष्ट सी. एन. अन्नादुराए ने द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (DMK) की स्थापना की.
  • 1967 में अन्नादुराए ने प्रथम द्रमुक सरकार का गठन किया.

श्री नारायण धर्म परिपालक योग 

  • श्री नारायण गुरू ने केरल तथा केरल के बाहर कई स्थानों पर एस. एन. डी. पी. या श्री नारायण धर्म परिपालन योगम नामक संस्था की स्थापना की.
  • श्री नारायण “एझवा” (एक अस्पृश्य जाति) जाति के थे.
  • उन्होंने दलित जातियों के उत्थान के लिए अनेक प्रयास किए.
  • उन्होंने कई मन्दिर बनवाए जो सभी वर्गों के लिए खुले थे.
  • उन्हें अस्पृश्य जातियों को पिछड़ी जातियों में परिवर्तित करने में विशेष सफलता मिली.
  • श्री नारायण गुरू ने महात्मा गांधी की भी निम्न जातियों के प्रति केवल मौखिक सहानुभूति प्रकट करने के लिए आलोचना की.

सत्य शोधक समाज 

  • भारत के पश्चिमी भाग में ज्योतिराव गोविन्दराव फूले ने दलित या निम्न जातियों के लिए संघर्ष किया.
  • उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेताओं की कमजोर वर्गों के लोगों के हितों की अनदेखी करने के लिए आलोचना की.
  • 1873 में उन्होंने सत्य शोधक समाज (सत्य की खोज करने वाला समाज) की स्थापना की.
  • इस समाज का उद्देश्य समाज के कमजोर वर्ग को सामाजिक न्याय दिलवाना था.

डॉ.भीमराव अम्बेडकर की भूमिका 

  • डॉ. भीमराव अम्बेडकर का जन्म 14 अप्रैल, 1891 को एक महार कुल (एक अस्पृश्य हिन्दू कुल) में महू में हुआ.
  • 1923 में वे बैरिस्टर बन गए.
  • जुलाई, 1924 में उन्होंने बम्बई में ‘बहिष्कृत हितकारिणी सभा’ की स्थापना की.
  • इसका उद्देश्य अस्पृश्य लोगों की नैतिक और भौतिक उन्नति करना था.
  • 1930 में अम्बेडकर ने राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश किया.
  • उन्होंने अछूतों के लिए पृथक निर्वाचन क्षेत्रों की मांग की.
  • लन्दन में हुए तीनों गोलमेज सम्मेलनों में अम्बेडकर ने अछूतों के प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया.
  • 17 अगस्त, 1932 के ब्रिटिश प्रधानमंत्री की साम्प्रदायिक निर्णय में दलितों के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्रों का प्रावधान था.
  • महात्मा गांधी इससे बहुत दु:खी हुए.
  • उन्होंने इस व्यवस्था को हटाने के लिए आमरण अनशन प्रारम्भ कर दिया.
  • अन्ततः “पूना समझौते” के द्वारा दलित वर्गों के लिए साधारण वर्ग में ही सीटों का आरक्षण किया गया.
  • अप्रैल, 1942 में उन्होंने अनुसूचित जातीय संघ का एक अखिल भारतीय दल के रूप में गठन किया.
  • भारत के संविधान का निर्माण करने वाली संविधान सभा में डॉ. अम्बेडकर को महत्वपूर्ण स्थान प्रदान किया गया.
  • उनके प्रयासों से भारत के संविधान में दलित जातियों के उत्थान के लिए समुचित प्रावधान किए गए.

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Sunday, January 20, 2019

Mahabhulekh महाभूलेख महाराष्ट्र (7/12 8अ) ऑनलाइन देखें mahabhulekh.maharashtra.gov.in


Mahabhulekh महाभूलेख महाराष्ट्र राज्य भूमि अभिलेख (7/12 व 8अ) ऑनलाइन देखें mahabhulekh.maharashtra.gov.in




यू पी भूलेख (UP Bhulekh) ऑनलाइन देखने के लिए कृपया यहां क्लिक करें
अपना खाता राजस्थान ऑनलाइन देखने के लिए कृपया यहां क्लिक करें

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Friday, January 18, 2019

UP Bhulekh यूपी भूलेख, खसरा खतौनी, ऑनलाइन नक़ल upbhulekh.gov.in (उत्तर प्रदेश सरकार)

राजस्थान राज्य अपना खाता (apna khata) जमाबंदी नकल खसरा खतौनी नंबर ऑनलाइन देखें

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राजस्थान अपना खाता (apna khata)

  • राजस्थान सरकार द्वारा बनाई गई नई परियोजना में राजस्थान के सभी लोग अपना खसरा खतौनी नंबर ऑनलाइन देख सकते हैं.
  • इस योजना का नाम अपना खाता (apna khata) रखा गया है.
  • इस योजना (apna khata) के तहत हर कोई जमीन मालिक अपनी जमीन का पूर्ण विवरण देख सकता है.
  • अपना खाता (apna khata) योजना के तहत राजस्थान के सभी लोग अपनी जमाबंदी ऑनलाइन देख सकते हैं.
  • अपनी भूमि, जमीन या खेत की जमाबंदी की नकल खसरा नंबर, जमीन का नक्शा अब हर कोई इंटरनेट के माध्यम से ऑनलाइन देख सकते हैं.
  • अपना खाता (apna khata) योजना का मुख्य उद्देश्य राजस्थान की जनता को उनकी भूमि या जमीन के बारे में जानकारी देने के लिए यह योजना बनाई गई है.

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अपना खाता (apna khata) के फायदे

  • अपना खाता (apna khata) में आप अपना खसरा नंबर, खतौनी नंबर जमाबंदी नंबर पता कर सकते हैं.
  • राजस्थान में अपना खाता (apnakhata) आप सभी अपने जमीन का विवरण घर बैठे देख सकते हैं.
  • अगर आपको अपनी जमीन के बारे में पता करवाना है तो पटवारी के पास पटवारखाने जाने की जरूरत नहीं है.
  • राजस्थान अपना खाता (apna khata) में सिर्फ रजिस्ट्रेशन करने के बाद आपको यह सुविधा मिल सकती है.

अपना खाता (apna khata) ऑनलाइन देखें

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  • वेबसाइट पोर्टल खोलने के बाद अपना खाता पर क्लिक करें या टच करें.
  • अब आपके सामने राजस्थान राज्य का मानचित्र या नक्शा खुल जाएगा.
  • अपने जिले का नाम सेलेक्ट करें या टच करें.
  • अब आपको अपने तहसील का नाम सेलेक्ट करें.

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तहसील गांव पटवार मंडल

  • तहसील सेलेक्ट करने के बाद एक नया पेज खुल जाएगा.

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  • तब इसके बाद आपको जमाबंदी वर्ष गत या चालु में चयन करना होगा.
  • अब आपको गांव पटवार मंडल-भू-अभि.निरी.वृत्त(संवत) का चयन करना होगा.

नकल (NAKAL) प्राप्त करें

  • गांव पटवार मंडल चुनने के लिए आपको अपने गांव के प्रथम अक्षर पर क्लिक या टच करना होगा.
  • अपना गांव का नाम दिख रहे सूची में खोजें और उस पर क्लिक या टच करें.
  • इसके बाद आपको अपना खाता – खाता से, खतरा से, नाम से, विकल्प का चुनाव करना होगा.

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  • अब इसके बाद काश्तकार का नाम सेलेक्ट करें.
  • अब आपको काश्तकार का विवरण पते सहित और चयनित खाता संख्या भी दिख रहा है तो नकल प्राप्त करें .

महत्वपूर्ण सूचना

  • अगर वेबसाइट नहीं चल रही है तो संभवत यह कारण हो सकते हैं-

इस समय  राजस्थान सरकार के अपना खाता पोर्टल  का एक साथ बहुत सारे लोग इस्तेमाल कर रहे हैं.

इस कारणवश सर्वर (server) काम नहीं कर रहा है.

  • अपना खाता (apna khata) वेबसाइट पर राजस्थान राज्य के कृषि भू अभिलेख के अंतर्गत जमाबंदी की प्रति उपलब्ध है.
  • इस सूचना का  हेतु सामान्य जानकारी प्राप्त करना है.
  • इस नकल का न्यायालय या अन्य कार्यालय में प्रमाणित/ प्राधिकृत प्रति के रूप में इस समय तो भी प्रयुक्त नहीं किया जा सकता.
  • प्रमाणित/ प्राधिकृत प्रति के लिए दिए गए निर्धारित कियोस्क सेंटर पर कृपया आवेदन करें.
  • भविष्य में डिजिटल साइन वाला सभी कार्यालयों में मान्य ऐसी नकल राजस्थान सरकार द्वारा मिलने की हम आशा करते हैं.

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